एहसास

           ख़ुद ही में एक एहसास हूँ


खुद ही में एक एहसास हूँ



ख़ुद ही में एक एहसास हूँ,

हां मैं अधूरी सी प्यास हूँ।

संघर्षों की, ग़म की, खुशियों की

भीड़ की तो कभी तन्हाई की

वो छलकते आंसुओं की

हां मैं अधूरी सी प्यास हूँ

ख़ुद ही में एक एहसास हूँ


रेत सी फ़िसलती आरज़ुओं की

हृदय में दबी भावनाओं की

वो अनकही दास्तानों की 

हां मैं अधूरी सी प्यास हूँ

ख़ुद ही में एक एहसास हूँ


वीरानों के उदासी की

जज़्बातों के रवानी की

वो शोर मचाते ख़ामोशी की

हां मैं अधूरी सी प्यास हूँ

ख़ुद ही में एक एहसास हूँ


रूह तक भीगी दुआओं की

दिल मे उठे तूफानों की

वो अनसुनी आवाज़ों की

हां मैं अधूरी सी प्यास हूँ

ख़ुद ही में एक एहसास हूँ


सागर के गहराई की

उन तपते शिलाओं की

वो अनछुए लम्हात की 

हां मैं अधूरी सी प्यास हूँ,

ख़ुद ही में एक एहसास हूँ।

          

              -©पूर्णिमा तिवारी

                       ब्लॉगर

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